RTE भुगतान पर छत्तीसगढ़ के निजी स्कूलों का आंदोलन तेज, बंद का ऐलान

Thu 16-Apr-2026,04:02 PM IST +05:30

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RTE भुगतान पर छत्तीसगढ़ के निजी स्कूलों का आंदोलन तेज, बंद का ऐलान Chhattisgarh-Private-Schools-RTE-Protest-Closure
  • छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों ने RTE भुगतान और प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग को लेकर 17 अप्रैल को काली पट्टी और 18 अप्रैल को बंद का ऐलान किया।

  • शिक्षा विभाग ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि सरकारी खर्च और निजी फीस में जो कम है, उसी के आधार पर भुगतान किया जाता है।

Chhattisgarh / Raipur :

Raipur/ छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों का सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। लंबे समय से लंबित RTE भुगतान और कम प्रतिपूर्ति राशि के विरोध में प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने राज्यव्यापी आंदोलन की घोषणा की है।

एसोसिएशन के अनुसार, 17 अप्रैल को राज्यभर के निजी स्कूलों में शिक्षक और संचालक काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे। इस दिन स्कूल खुले रहेंगे और कक्षाएं सामान्य रूप से संचालित होंगी, लेकिन विरोध के प्रतीक के रूप में सभी शिक्षक काली पट्टी पहनेंगे।

इसके अगले दिन यानी 18 अप्रैल को सभी निजी स्कूलों को बंद रखने का निर्णय लिया गया है। इस दिन पूरे प्रदेश में स्कूलों में पढ़ाई नहीं होगी और विद्यार्थियों को अवकाश दिया जाएगा। एसोसिएशन का कहना है कि यह कदम सरकार तक अपनी मांगों को मजबूती से पहुंचाने के लिए उठाया जा रहा है।

निजी स्कूल संचालकों का आरोप है कि RTE के तहत मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है। साथ ही, वर्तमान में दी जा रही राशि स्कूलों के खर्च के मुकाबले काफी कम है, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता के मुताबिक, इस मुद्दे को कई बार सरकार के सामने उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इसी कारण आंदोलन को तेज करने का निर्णय लिया गया है।

निजी स्कूलों की मुख्य मांग है कि RTE के तहत प्रतिपूर्ति राशि का पुनर्निर्धारण किया जाए और बकाया भुगतान जल्द जारी किया जाए। इसके अलावा, उन्होंने सरकार से अपने स्कूलों में प्रति छात्र होने वाले खर्च का आंकड़ा सार्वजनिक करने की भी मांग की है।

वहीं, शिक्षा विभाग का कहना है कि प्रतिपूर्ति राशि निर्धारित करने के लिए दो मानक अपनाए जाते हैं—सरकारी स्कूलों में प्रति छात्र खर्च और निजी स्कूल की फीस। इनमें से जो कम होता है, उसी के आधार पर भुगतान किया जाता है।

गौरतलब है कि निजी स्कूल 1 मार्च से ही असहयोग आंदोलन चला रहे हैं और पहले ही RTE के तहत नए प्रवेश रोकने का फैसला ले चुके हैं।

यह आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है, जिससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है।